झांसी। आवास एवं विकास परिषद की योजना संख्या-4 में जमीन अधिग्रहण के खिलाफ खून से चिट्ठी लिखकर आपत्ति करने वाले किसानों ने भरी बैठक में हंगामा कर दिया। नियोजन समिति के सामने 3 किसानों ने शरीर पर डीजल उड़ेलकर आत्महत्या का प्रयास किया।
इससे अफरा-तफरी मच गई और सभागार में खड़ी पुलिस ने तत्काल तीनों किसानों को पकड़ लिया और समझाते हुए शरीर से डीजल साफ किया। किसानों को आरोप था कि वह समिति से पूछ रहे थे कि अब तक आपत्तियों की सुनवाई में उनकी क्या राय है, जिसका वह गोल-मोल जवाब दे रहे थे। अपर जिलाधिकारी ने आपत्तियों के आधार पर ही कोई निर्णय लेने का आश्वासन दिया, जिसके बाद ही किसान शान्त हुए।
आवास एवं विकास परिषद उत्तर प्रदेश द्वारा प्रस्तावित आवास विकास योजना संख्या-4 के तहत जमीनों का अधिग्रहण किया जाना है, जिसका किसान पुरजोर विरोध कर रहे हैं। किसानों द्वारा लगाई गई आपत्तियों की सुनवाई करने के लिए विभाग द्वारा नियोजन समिति का गठन किया गया है, जो 3 दिन से किसानों की समस्याएं सुन रही है। इसमें किसान लगातार अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं।
शुक्रवार को तो किसानों ने खून से आपत्ति लिखकर जमीन नहीं देने का खुला एलान कर दिया था। शनिवार को भी तीसरे और अन्तिम दिन की बैठक दीनदयाल सभागार में हुई। किसानों ने 3 दिन से चल रही प्रक्रिया के सम्बन्ध में समिति की राय जानना चाही।
किसानों का आरोप था कि समिति के सदस्य उनको गोल-मोल जवाब देकर गुमराह करने लगे। इसी को लेकर किसान भड़क गए और अधिकारियों के विरोध में नारे लगाने लगे। इसी दौरान एक किसान ने छुपाकर लाई गई डीजल से भरी बोतल निकाली और अपने शरीर पर डीजल उड़ेल लिया।
इसके बाद दो और किसानों ने बोतल लेकर अपने शरीर पर डीजल डाल लिया और आग लगाने के लिए माचिस माँगने लगे। यह देखकर पुलिस ने उनको रोका और साथियों ने उनके शरीर से डीजल को पोंछा। इससे सभागार में अफरा-तफरी मच गयी। आवास विकास परिषद के अधिकारी सभागार से निकल गए।
इसकी जानकारी उच्चाधिकारियों को भी दी गई, जिसके बाद अपर जिलाधिकारी वरुण पाण्डेय व सिटि मैजिस्ट्रेट प्रमोद झा आ गए और स्थिति की गम्भीरता समझते हुए किसानो को समझाया की उनकी भूमि तब तक नहीं ली जाएगी, जब तक वह सहमत नहीं होंगे।
किसानों ने पत्र सौंपते हुए भूमि अधिग्रहण पर विरोध दर्ज कराया और कहा कि यह योजना उनकी आजीविका और भविष्य को छीनने वाली है। बैठक के दौरान किसानों ने स्थानीय अधिकारियों पर कई आरोप लगाए। इस दौरान किसान अरविन्द, अजय खुराना, शमीम, मानवेन्द्र सिंह, चितवन बोहरे, कोमल सिंह, सियाराम, दीपू, अनिल कुशवाहा, चिंतन बबेले, सतीश यादव, अंकित, उत्तम सिंह, मृगेन्द्र राजपूत, देवेश कुमार, रानू टाँकोरी, हकीम, गुलाब, जाहर सिंह आदि उपस्थित रहे। इस सम्बन्ध में आवास एवं विकास परिषद के अधिशासी अभियन्ता डीबी यादव ने बताया कि 5 हजार से ज्यादा आपत्तियाँ थीं, जिनको लखनऊ से आयी नियोजन समिति के अधिकारियों ने सुना और रिकॉर्ड किया। आपत्तियों के आधार पर ही नियोजन समिति निर्णय लेगी।
किसानों ने यह रखीं मांग
- योजना-4 को तत्काल निरस्त किया जाए।
- अधिग्रहण से उनकी भूमि को मुक्त किया जाए।
- दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कार्यवाही हो।



